Mamta Kulkarni ने किन्नर अखाड़ा के महामंडलेश्वर पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा देकर एक बार फिर सुर्खियों में आ गई हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय उन्होंने पूरी मानसिक स्पष्टता और आत्मिक संतुलन के साथ लिया है।
बीते वर्ष महाकुंभ के दौरान किन्नर अखाड़े द्वारा उन्हें महामंडलेश्वर की उपाधि दी गई थी और उनका नाम श्री यमाई ममता नंद गिरि रखा गया था।
अपने त्यागपत्र में ममता कुलकर्णी ने लिखा कि उनका आध्यात्मिक मार्ग किसी पद, वस्त्र या प्रतीक का मोहताज नहीं है।
उनका मानना है कि सत्य स्वयं में पूर्ण होता है और उसे किसी बाहरी पहचान की आवश्यकता नहीं होती।
उन्होंने किन्नर अखाड़े की आचार्य लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के प्रति सम्मान और आभार भी व्यक्त किया।
ममता ने कहा कि वे पिछले 25 वर्षों से आध्यात्मिक जीवन जी रही हैं और उनके गुरु श्री चैतन्य गगनगिरि नाथ ने भी कभी किसी पद को स्वीकार नहीं किया।
आगे भी वे अंतर्मुखी साधना जारी रखेंगी और आवश्यकता पड़ने पर समान विचारधारा वाले लोगों के साथ अपना ज्ञान साझा करेंगी।
गौरतलब है कि शंकराचार्य से जुड़े एक बयान के बाद किन्नर अखाड़े ने पहले ही उन्हें निष्कासित कर दिया था,

हालांकि ममता का कहना है कि पद के बिना भी उनका आस्तिक जीवन पूरी निष्ठा से चलता रहेगा।









