laakhon का शौचालय बना शोपीस ! सार्वजनिक सुविधा गंदगी में दबी

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द स्वार्ड ऑफ इण्डिया
बाराबंकी । laakhon का शौचालय बना शोपीस ! स्वच्छता अभियान के बड़े-बड़े दावों के बीच बनीकोडर ब्लॉक परिसर में बना लाखों रुपये की लागत वाला सार्वजनिक शौचालय खुद बदहाली का प्रतीक बन गया है।

वर्ष 2020-21 में क्षेत्र पंचायत निधि से निर्मित यह शौचालय आज गंदगी, लापरवाही और अव्यवस्था की मार झेल रहा है।

पशु चिकित्सालय के पास स्थित इस शौचालय में गंदगी का अंबार लगा है। टोटियां गायब हैं, पानी की कोई व्यवस्था नहीं है और साफ-सफाई पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।

हालत यह है कि ब्लॉक कार्यालय आने वाली महिला कर्मचारियों और आम लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

लाखों की लागत से बना यह शौचालय अब उपयोग के बजाय उपेक्षा की कहानी बयां कर रहा है।

भाकियू का हमला — “जब ब्लॉक का हाल ये है, तो गांवों का क्या होगा?

भारतीय किसान यूनियन (धर्मेंद्र गुट) के प्रदेश प्रभारी मायाराम यादव ने मामले को गंभीर बताते हुए सीधी चोट की है।

उन्होंने कहा कि जब ब्लॉक मुख्यालय का सार्वजनिक शौचालय ही इस हाल में है, तो ग्राम पंचायतों में बने शौचालयों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और शौचालय को तत्काल चालू कराने की मांग की है।

एक सप्ताह में सुधार का वादा

बनीकोडर ब्लॉक प्रमुख उर्मिला वर्मा के प्रतिनिधि चंद्रशेखर वर्मा ने एक सप्ताह के भीतर शौचालय को पूरी तरह से चालू कराने का आश्वासन दिया है।

उन्होंने कहा कि साफ-सफाई की जिम्मेदारी सहायक विकास अधिकारी की है और यह भी जांच की जाएगी कि नियमित निगरानी क्यों नहीं की जा रही थी।

सहायक विकास अधिकारी शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि क्षेत्र पंचायत निधि से निर्मित इस शौचालय की जांच कराई जाएगी और जो भी कमियां पाई जाएंगी, उन्हें तत्काल दुरुस्त कराकर बंद पड़े सार्वजनिक शौचालय को चालू कराया जाएगा।

उद्घाटन हुआ धूमधाम से, अब बदहाली पर सवाल

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2020-21 में बने इस शौचालय का उद्घाटन तत्कालीन सांसद लल्लू सिंह, दरियाबाद विधायक एवं वर्तमान राज्य मंत्री सतीश चंद्र शर्मा तथा पूर्व ब्लॉक प्रमुख रुचि वर्मा ने संयुक्त रूप से किया था।

उद्घाटन के कुछ ही वर्षों में शौचालय का इस कदर बदहाल हो जाना निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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अब सवाल यह है कि लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी जनता को मूलभूत सुविधा क्यों नहीं मिल पा रही? और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय कब होगी।

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