मध्यप्रदेश में UPI लेनदेन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर व्यापारियों का विरोध सामने आया है। व्यापारिक संगठनों के आह्वान पर बुधवार को प्रदेश में ‘नो यूपीआई डे’ मनाने का फैसला किया गया है।
इंदौर समेत कई शहरों में व्यापारी इस अभियान के जरिए अपनी आपत्ति दर्ज करा रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित शुल्क से खासकर बड़े और थोक कारोबार में लेनदेन की लागत बढ़ सकती है।
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल मध्यप्रदेश के प्रदेश महासचिव अनुपम अग्रवाल ने शुल्क व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है।
मौजूदा व्यवस्था के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होना है।
यह शुल्क व्यापारी पक्ष पर होगा और सामान्य उपभोक्ता से अलग से UPI ट्रांजैक्शन फीस लेने का प्रावधान नहीं है।

मध्यप्रदेश में पेट्रोल पंप डीलरों ने भी 16 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान स्वीकार नहीं करने का निर्णय घोषित किया है।
डीलरों ने अतिरिक्त लागत का हवाला दिया है। व्यापारियों का कहना है कि सरकार और संबंधित संस्थाओं को शुल्क व्यवस्था पर पुनर्विचार करना चाहिए। वहीं आधिकारिक व्यवस्था के तहत छोटे व्यापारियों के लिए कुछ छूट भी निर्धारित की गई है।









