ब्यूरो चीफ आर. एल. पाण्डेय
लखनऊ । Climate change” गोयल आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल में 27 फरवरी 2026 को “आयुर्वेदिक पैथोफिज़ियोलॉजी और एथनोबोटेनिकल थेरेप्यूटिक्स के एकीकृत दृष्टिकोण” विषय पर प्रथम राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई।
द्रव्यगुण एवं रोग निदान विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से लगभग 450 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। संगोष्ठी का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ।
मुख्य अतिथि डॉ. मोहन लाल जयसवाल ने जलवायु परिवर्तन का औषधीय पौधों की शक्ति पर पड़ने वाले प्रभाव, जनजातीय परंपराओं में प्रचलित औषधियों तथा रिवर्स फार्माकोलॉजी की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
विशेषज्ञों ने आयुर्वेद में डिजिटल हेल्थ, बायोसेंसर, बायो-इन्फॉर्मेटिक्स और सटीक रोगनिदान की आवश्यकता पर जोर दिया।
आयोजन सचिवों ने कहा कि “द्रव्य” और “निदान” का संतुलित समन्वय ही आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला सकता है।

संगोष्ठी का केंद्रीय संदेश रहा—सटीक निदान और गुणवत्तापूर्ण औषधि से ही प्रभावी उपचार संभव है।









