बाराबंकी : handloom और पावर लूम उद्योग से जुड़े बाराबंकी जिले के ज़ैदपुर कस्बे के बुनकरों के लिए लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार राहत भरी खबर सामने आई है।
वर्षों से हैंडलूम विभाग द्वारा प्रमाण पत्र जारी न होने के कारण बुनकरों को मिलने वाली बिजली सब्सिडी बंद थी, जिससे उन पर भारी-भरकम बिजली बिल का बकाया जमा हो गया था।
हालात इतने खराब हो गए थे कि कई बुनकरों ने पावर लूम कनेक्शन कटवाने का फैसला कर लिया, लेकिन बकाया बिल के चलते बिजली विभाग ने कनेक्शन डिस्कनेक्ट करने से भी मना कर दिया।
इस दोहरी समस्या ने बुनकरों की आजीविका पूरी तरह ठप कर दी थी। न तो वे काम कर पा रहे थे और न ही बढ़ते बिल से छुटकारा मिल पा रहा था।
मामले की गंभीरता को समझते हुए ज़ैदपुर के चेयरमैन प्रतिनिधि दाऊद अलीम ने इसे प्रमुखता से उठाया और लगातार प्रशासनिक स्तर पर प्रयास किए।
अंततः उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद बुनकरों के पक्ष में फैसला आया। अदालत के आदेश के बाद न केवल बिजली बिल के बकाया को माफ किया गया,
बल्कि पावर लूम कनेक्शन को पीडी (स्थायी रूप से बंद) करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इससे बुनकरों को अब यह विकल्प मिल गया है
कि वे चाहें तो दोबारा काम शुरू करें या बिना कर्ज के नए सिरे से जीवन की शुरुआत करें। प्रभावित बुनकरों का कहना है कि यह फैसला उनके लिए नई उम्मीद लेकर आया है।
उन्होंने दाऊद अलीम और न्यायालय का आभार जताते हुए कहा कि वर्षों बाद उन्हें वास्तविक राहत मिली है।

ज़ैदपुर जैसे कस्बों में, जहां पावर लूम रोजगार का मुख्य साधन है, यह निर्णय बुनकर समुदाय के लिए मील का पत्थर साबित होगा।









