फिल्म : Rishabh Shetty आज के भारतीय सिनेमा में केवल एक सफल फिल्मकार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की जीवंत पहचान बनकर उभरे हैं।
अभिनेता, लेखक और निर्देशक के रूप में उन्होंने ऐसी कहानियाँ रची हैं, जिनमें परंपरा, आस्था और लोक जीवन की आत्मा स्पष्ट रूप से झलकती है।
उनकी रचनात्मक यात्रा मनोरंजन से आगे बढ़कर सांस्कृतिक चेतना का रूप ले चुकी है, जिसने देश-विदेश में भारतीय मूल्यों को नई पहचान दी है।
ऋषभ शेट्टी की फिल्मों की जड़ें भारत की लोक परंपराओं में गहराई से धंसी हुई हैं।
कांतारा जैसी फिल्मों के माध्यम से उन्होंने स्थानीय देव परंपराओं, अनुष्ठानों और आध्यात्मिक विश्वासों को पूरे सम्मान और सच्चाई के साथ मुख्यधारा सिनेमा में प्रस्तुत किया।
उनका सिनेमा ग्रामीण भारत के वास्तविक स्वरूप को सामने लाता है, जहां प्रकृति, समाज और आस्था का गहरा संबंध दिखाई देता है।
उनकी कहानियों की खासियत यह है कि वे क्षेत्रीय होते हुए भी राष्ट्रीय स्तर पर जुड़ाव बनाती हैं। भाषा और भूगोल की सीमाओं से परे, उनके सांस्कृतिक प्रतीक और लोक कथाएँ हर भारतीय को अपनी जड़ों से जोड़ती हैं।
यही कारण है कि उनकी फिल्में केवल देखी नहीं जातीं, बल्कि महसूस की जाती हैं। ऋषभ शेट्टी सिनेमा को सांस्कृतिक संरक्षण का माध्यम भी बनाते हैं।
उनकी फिल्मों में दिखाए गए रीति-रिवाज और परंपराएँ आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक दस्तावेज़ का काम करती हैं।
उनकी छवि सादगी, विरासत और प्रामाणिकता से जुड़ी है, जिस कारण वे भारतीय मूल्यों से जुड़े ब्रांड्स के लिए स्वाभाविक विकल्प बनते हैं।
व्यक्तिगत जीवन में भी वे ज़मीन से जुड़े हुए हैं। त्योहारों और धार्मिक परंपराओं में उनकी सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि उनकी सफलता आस्था और विनम्रता से प्रेरित है।
₹1300 करोड़ से अधिक की कमाई करने वाली फ्रैंचाइज़ी के पीछे उनका यही सांस्कृतिक दृष्टिकोण है,

जो साबित करता है कि भारतीय संस्कृति में रची-बसी कहानियाँ आज भी वैश्विक स्तर पर गूंजने की शक्ति रखती हैं।









