बाराबंकी : Shab-E-Barat की मुक़द्दस रात बाराबंकी जनपद में इबादत, रौशनी और रूहानियत की गवाही देती नज़र आई।
अहमदपुर कस्बे सहित आसपास के इलाकों में मुस्लिम समाज ने इस पाक रात को पूरी अकीदत और एहतराम के साथ मनाया।
सूरज ढलते ही मस्जिदों, मजारों और कब्रिस्तानों में रौनक बढ़ गई और हर ओर दुआओं का सिलसिला शुरू हो गया।
इस मौके पर लोग अपने मरहूम अज़ीज़ों की याद में कब्रिस्तानों में पहुंचे और उनकी मगफिरत के लिए दुआएं मांगीं।
मोमबत्तियों की रौशनी, अगरबत्तियों की खुशबू और कुरआन की तिलावत ने माहौल को पूरी तरह रूहानी बना दिया।
मगरिब से लेकर फज्र तक नमाज़, नफिल इबादत और कुरआन ख़्वानी का सिलसिला चलता रहा। कब्रों पर फूल और चादरें चढ़ाकर रहमत और बख़्शिश की दुआ की गई।
घरों में भी शबे-ए-बरात की पाक रवायत निभाई गई। चने की दाल और रवा का हलवा तैयार कर फातिहा दिलाई गई, जबकि कई परिवारों ने हलवा बांटकर इसाले-सवाब किया।
महिलाएं, बच्चे और बुज़ुर्ग सभी इबादत में मशगूल दिखे। कस्बे और ग्रामीण इलाकों में सामूहिक दुआओं और महफिल-ए-मिलाद का आयोजन हुआ, जहां मुल्क में अमन-ओ-अमान और भाईचारे की दुआ की गई।
अहमदपुर के ग्रामीणों ने कब्रिस्तान के रास्तों की साफ-सफाई और रौशनी की बेहतर व्यवस्था कर ज़ायरीनों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा।

इसी तरह पूरे बाराबंकी जनपद में शबे-ए-बरात पूरी आस्था और सुकून के साथ मनाई गई।









