लखनऊ : Swami Avimukteshwarananda Saraswati से जुड़ा मामला, जो माघ मेला के दौरान मौनी अमावस्या स्नान को लेकर सामने आया था, अब प्रशासनिक विवाद से आगे बढ़कर कानूनी और धार्मिक संस्थानों से जुड़ा मुद्दा बन गया है।
प्रयागराज में माघ मेला प्राधिकरण ने उन्हें नोटिस जारी कर ‘शंकराचार्य’ की उपाधि के उपयोग पर स्पष्टीकरण मांगा है।
प्राधिकरण का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश में उन्हें यह उपाधि प्रयोग करने से रोका गया है, इसके बावजूद वे इसका लगातार इस्तेमाल कर रहे हैं।
इसी को लेकर अब आधिकारिक स्तर पर सवाल उठाए गए हैं। गौरतलब है
कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, जिन्हें उत्तराखंड स्थित ज्योतिर्मठ का 46वां शंकराचार्य बताया जाता है,
ने आरोप लगाया था कि मौनी अमावस्या के दिन उत्तर प्रदेश पुलिस ने उन्हें त्रिवेणी संगम में स्नान करने से रोक दिया।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, उस समय उनके साथ 200 से 300 अनुयायियों का बड़ा समूह मौजूद था और अत्यधिक भीड़ वाले स्नान पर्व पर किसी भी प्रकार की शोभायात्रा या समूह प्रवेश के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य होती है, जो उनके पास नहीं थी

। इसी वजह से सुरक्षा और व्यवस्था को देखते हुए उन्हें रोका गया।









