World Radio Day 2026 हमें यह याद दिलाता है कि तकनीक बदलती है, पर आवाज़ की ताकत कायम रहती है। इस वर्ष की थीम “रेडियो और कृत्रिम बुद्धिमत्ता: एआई एक उपकरण है,
आवाज़ नहीं” प्रसारण जगत में एआई की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है, लेकिन यह भी स्पष्ट करती है कि मानवीय संवेदना का कोई विकल्प नहीं। भारत में रेडियो प्रसारण को लगभग 94 वर्ष हो चुके हैं
और यह विश्व रेडियो दिवस की 15वीं वर्षगांठ है। 13 फरवरी को यह दिवस इसलिए मनाया जाता है
क्योंकि 1946 में संयुक्त राष्ट्र के पहले रेडियो स्टेशन की स्थापना हुई थी। 2011 में यूनेस्को ने इसे आधिकारिक मान्यता दी और 2012 में पहली बार इसे वैश्विक स्तर पर मनाया गया।
रेडियो आज भी सबसे सुलभ माध्यम है—भाषाई विविधता, ग्रामीण पहुंच और विश्वसनीयता इसकी पहचान है।
बीबीसी हिंदी-उर्दू सेवा से लेकर विविध भारती और रेडियो सीलोन के कार्यक्रमों तक, रेडियो ने पीढ़ियों को जोड़ा है।
एफएम और सामुदायिक रेडियो के विस्तार ने इसे नया जीवन दिया है।

हरदोई का ‘रेडियो जागो 90.4 एफएम’ जैसे प्रयास स्थानीय आवाज़ों को मंच दे रहे हैं। तकनीक आगे बढ़े, पर असली शक्ति इंसानी आवाज़ में ही है।









