मसौली शरीफ बाराबंकी : Urs-e-Ismaili का 17 नवंबर से आगाज़, मसौली शरीफ में जुटेंगे जायरीन . बाराबंकी की प्रसिद्ध ख़ानक़ाह–ए–इस्माइलिया, मसौली शरीफ में 17 से 19 नवंबर 2026 तक 284वें उर्स–ए–इस्माइली एवं मशायख़–ए–मसौली कॉन्फ्रेंस का आयोजन होगा।
तीन दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम की शुरुआत 17 नवंबर को परचम कुशाई की रस्म के साथ की जाएगी। आयोजन हज़रत गुलज़ार–ए–मिल्लत क़िब्ला की सरपरस्ती में संपन्न होगा।
इस विशेष अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से उलमा, मशायख़, सूफी परंपरा से जुड़े विद्वानों तथा जायरीनों के पहुंचने की उम्मीद है। आयोजन को लेकर अकीदतमंदों में उत्साह है और तैयारियों का सिलसिला जारी है।
परचम कुशाई से शुरू होंगी धार्मिक गतिविधियां
उर्स के पहले दिन परचम कुशाई की रस्म अदा की जाएगी। इसके बाद 18 और 19 नवंबर को भी धार्मिक एवं रूहानी कार्यक्रम आयोजित होंगे।
सम्मेलन के माध्यम से बुजुर्गाने दीन की शिक्षाओं, धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक मार्गदर्शन को लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा।

मोहब्बत और भाईचारे का संदेश
ख़ानक़ाह–ए–इस्माइलिया की परंपरा से जुड़ा यह आयोजन धार्मिक शिक्षा, अच्छे अख़लाक़ और इंसानियत के मूल्यों को आगे बढ़ाने का अवसर माना जा रहा है।
इसके साथ ही समाज में आपसी प्रेम, सौहार्द और अमन–शांति को प्रोत्साहित करने का संदेश भी दिया जाएगा। तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले अकीदतमंदों को एक–दूसरे से मिलने और धार्मिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलेगा। मसौली शरीफ का यह आयोजन क्षेत्र की रूहानी विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।









