लखनऊ : Amit Shah देश की सियासत में रणनीति और संगठन के दम पर पहचान बनाने वाले अमित शाह की सक्रियता एक बार फिर चर्चा में है।
छत्तीसगढ़, हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली के बाद अब पश्चिम बंगाल में भी उनकी चुनावी रणनीति का असर देखने को मिल रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव अचानक नहीं, बल्कि लंबे समय से तैयार की गई रणनीतिक जमीन का परिणाम है।
पश्चिम बंगाल, जो कभी रवींद्रनाथ टैगोर और स्वामी विवेकानंद जैसी महान हस्तियों की विरासत के लिए जाना जाता था, बीते वर्षों में राजनीतिक टकराव और आर्थिक चुनौतियों से जूझता रहा।
वामपंथी शासन के लंबे दौर और उसके बाद तृणमूल कांग्रेस के कार्यकाल में राज्य की औद्योगिक रफ्तार पर असर पड़ा।
इसी पृष्ठभूमि में अमित शाह ने जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने की रणनीति अपनाई। लगातार रैलियों, रोड शो और बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर विशेष ध्यान दिया गया।
वहीं ममता बनर्जी के गढ़ माने जाने वाले भवानीपुर जैसे क्षेत्रों में भी कड़ी टक्कर देखने को मिली।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, यह परिदृश्य केवल चुनावी परिणामों का नहीं, बल्कि बदलती राजनीतिक प्राथमिकताओं का संकेत है, जहां मतदाता विकास, रोजगार और स्थिर शासन को अधिक महत्व दे रहे हैं।









