लखनऊ : Croplife India ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर अनधिकृत और बिना नियामक अनुमति वाले कीटनाशकों की बिक्री को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
संगठन का कहना है कि ऑनलाइन माध्यम से फसल संरक्षण उत्पादों की बढ़ती बिक्री के साथ नियमों के पालन, निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था को तत्काल सशक्त बनाने की आवश्यकता है।
क्रॉपलाइफ इंडिया ने सरकार और उद्योग के बीच एक साझा और स्पष्ट नियामक ढांचे की मांग की है, ताकि किसानों की सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला की विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।
यह चिंता नई दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान सामने आई, जहां ई-कॉमर्स के जरिए कृषि-इनपुट्स की बिक्री से जुड़े जोखिमों और संभावनाओं पर चर्चा हुई।
सम्मेलन में नीति-निर्माता, नियामक संस्थाएं, उद्योग प्रतिनिधि और डिजिटल कॉमर्स से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए।
सभी ने माना कि कृषि क्षेत्र में डिजिटल बिक्री तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ नए खतरे भी उभर रहे हैं।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि आयुक्त डॉ. पी. के. सिंह ने कहा कि कीटनाशक जैसे संवेदनशील उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री में केवल विक्रेताओं के बुनियादी दस्तावेजों की जांच पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने उत्पाद की गुणवत्ता, असलियत और आपूर्ति श्रृंखला की जवाबदेही को मजबूत करने पर जोर दिया और कहा कि इन पहलुओं को प्रस्तावित पेस्टीसाइड्स मैनेजमेंट बिल, 2025 में स्पष्ट रूप से शामिल किया जाना चाहिए।
केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण समिति के सचिव डॉ. सुभाष चंद ने कहा कि डिजिटल और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ग्रामीण भारत में तेजी से पहुंच बना रहे हैं, लेकिन कीटनाशकों की प्रकृति को देखते हुए गुणवत्ता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि ऑनलाइन बिक्री बढ़ने के साथ-साथ प्लेटफॉर्म्स और निर्माताओं—दोनों की जिम्मेदारी भी बढ़ती है।
ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) के कृषि डोमेन लीड रवि शंकर ने बताया कि सही उत्पाद जानकारी, पारदर्शी विवरण और डिजिटल ट्रेसबिलिटी से किसानों को असली और नकली उत्पादों में अंतर करने में मदद मिल सकती है।
क्रॉपलाइफ इंडिया के चेयरमैन अंकुर अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि संगठन ई-कॉमर्स के विरोध में नहीं है, बल्कि यह चाहता है कि डिजिटल व्यापार के अनुरूप नियम और उनके पालन की व्यवस्था हो।
उन्होंने कहा कि अनधिकृत कीटनाशकों की बिक्री को रोकना सरकार और उद्योग—दोनों की साझा जिम्मेदारी है, क्योंकि इसका सीधा संबंध किसान सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता विश्वास से है।
संगठन ने यह भी बताया कि वर्तमान कानूनों के तहत ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की भूमिका और जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं है, जिससे निगरानी में खामियां पैदा हो रही हैं।

क्रॉपलाइफ इंडिया का मानना है कि ड्राफ्ट पेस्टीसाइड्स मैनेजमेंट बिल, 2025 में ई-कॉमर्स से जुड़े प्रावधानों को स्पष्ट कर इन कमियों को दूर किया जाना चाहिए, ताकि डिजिटल माध्यम से भी सुरक्षित और जिम्मेदार कृषि व्यापार को बढ़ावा मिल सके।









