सीजेपी के नेतृत्व में आयोजित संसद मार्च ने राजधानी के राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। बड़ी संख्या में युवा और समर्थक सड़कों पर पहुंचे और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों सहित विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत कई मांगें सामने रखीं। आंदोलन में शामिल लोगों ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए अपनी नाराजगी व्यक्त की।
प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति भी बनी, जिसके बाद कई लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई।
इस प्रदर्शन को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी चर्चा हुई। रिपोर्टों में बताया गया कि सोनम वांगचुक से जुड़े घटनाक्रम के बाद आंदोलन को लेकर लोगों में और अधिक आक्रोश देखने को मिला।

संसद क्षेत्र के आसपास बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्र हुए और अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई। विपक्षी दलों ने भी संसद में इन मुद्दों पर चर्चा की मांग की। कई नेताओं ने प्रदर्शनकारियों की मांगों का समर्थन किया और सरकार से संवाद की अपील की।
सीजेपी आंदोलन अब शिक्षा, रोजगार और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर व्यापक राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। प्रदर्शनकारी आगे भी अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाने की बात कह रहे हैं।








