बुधवार को आई अचानक बाढ़ ने नेपाल के कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में काम कर रहे कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, 11 परियोजनाओं से 900 से अधिक कर्मचारी लापता बताए जा रहे हैं।
हालांकि, सुरंगों के भीतर वास्तव में कितने लोग फंसे हैं, इसकी स्पष्ट जानकारी अभी सामने नहीं आई है। नेपाली सेना के अनुसार, रसुवागढ़ी, लांगटांग, चिलिमे, अपर त्रिशूली-3ए और अपर त्रिशूली-3बी जैसे प्रोजेक्ट्स में बचाव अभियान जारी है।
भारत और चीन के विशेषज्ञ भी राहत एवं बचाव प्रयासों में सहयोग कर रहे हैं। रेस्क्यू टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती हाइड्रोपावर सुरंगों की संरचना और बाढ़ से पैदा हुए हालात हैं।
इन सुरंगों का इस्तेमाल नदियों से पानी को बिजली उत्पादन केंद्र तक पहुंचाने के लिए किया जाता है। ऐसे प्रोजेक्ट अक्सर पहाड़ी इलाकों में बनाए जाते हैं,

जहां सुरंगों के प्रवेश और निकास मार्ग नदी के आसपास होते हैं। इंजीनियरों के मुताबिक, बाढ़ का पानी अपने साथ भारी मात्रा में कीचड़ और मलबा सुरंगों में पहुंचा सकता है।
इससे रास्ते अवरुद्ध होने के साथ अंदर पानी और मलबे का दबाव बढ़ने का खतरा रहता है। यही वजह है कि राहतकर्मियों के लिए सुरंगों में प्रवेश करना जोखिम भरा है और बचाव अभियान बेहद सावधानी से आगे बढ़ाया जा रहा है।








