लखनऊ : Pain-free life के लिए फिजियोथेरेपी अपनाने पर डॉ. ओमजी तिवारी ने दिया जोर . बदलती दिनचर्या और शारीरिक गतिविधियों में कमी के बीच फिजियोथेरेपी शरीर को सक्रिय बनाए रखने और कई शारीरिक परेशानियों से उबरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
डॉ. ओमजी तिवारी के अनुसार, लंबे समय तक बैठकर काम करने, गलत पोस्चर और नियमित व्यायाम की कमी से कमर, गर्दन तथा जोड़ों से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
फिजियोथेरेपी में व्यक्ति की शारीरिक स्थिति के अनुसार व्यायाम, मैनुअल थेरेपी, स्ट्रेचिंग और मूवमेंट आधारित तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।
इसका उद्देश्य दर्द और जकड़न को नियंत्रित करने के साथ शरीर की गतिशीलता तथा कार्यक्षमता में सुधार करना होता है। डॉ. ओमजी तिवारी का कहना है
कि चोट या सर्जरी के बाद पुनर्वास में भी फिजियोथेरेपी उपयोगी हो सकती है। नियमित और सही तरीके से किए गए अभ्यास शरीर की मांसपेशियों को मजबूत बनाने, लचीलापन बढ़ाने और संतुलन सुधारने में मदद कर सकते हैं।

यह उपचार पद्धति विभिन्न आयु वर्ग के लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है, हालांकि हर व्यक्ति की समस्या अलग होती है। इसलिए फिजियोथेरेपी शुरू करने से पहले प्रशिक्षित विशेषज्ञ से शारीरिक स्थिति का आकलन कराना जरूरी है।
सही मार्गदर्शन और नियमित अभ्यास के साथ फिजियोथेरेपी लोगों को अपनी दैनिक गतिविधियों में सक्रिय रहने और बेहतर शारीरिक कार्यक्षमता बनाए रखने में सहायता कर सकती है।








