लखनऊ : Cancer से लड़ाई में बोन मैरो ट्रांसप्लांट निभा रहा महत्वपूर्ण भूमिका .मेदांता कैंसर इंस्टीट्यूट, लखनऊ के हीमैटोलॉजी एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांट विभाग ने 100 सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट पूरे कर लिए हैं।
3 साल पहले विभाग ने अपना पहला बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया था। आज यह उपलब्धि उन मरीजों और परिवारों के लिए उम्मीद का संदेश है, जिन्होंने गंभीर रक्त संबंधी बीमारियों और ब्लड कैंसर के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी।
मेदांता हॉस्पिटल, लखनऊ के डायरेक्टर, हीमैटोलॉजी एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांट डॉ. अंशुल गुप्ता ने कहा, “जब हमने अपना पहला बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया था, तब छोटी टीम होने के बावजूद मरीजों को बेहतर इलाज देने का संकल्प था।
आज 100 सफल ट्रांसप्लांट पूरे होना हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह सिर्फ एक नम्बर नहीं है। इसके पीछे 100 ऐसे परिवार हैं जिन्होंने अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर का सामना किया और फिर सामान्य ज़िंदगी की ओर लौटे।
उन्होंने कहा कि हर कामयाब बोन मैरो ट्रांसप्लांट के पीछे कई लोगों की मेहनत और समर्पण होता है। डॉक्टर, नर्सें, लैब विशेषज्ञ, डोनर्स और मरीजों के परिवार मिलकर इस पूरी प्रक्रिया को सफल बनाते हैं। कई डोनर्स ऐसे भी होते हैं
जो किसी अनजान मरीज़ की मदद के लिए आगे आते हैं और उन्हें जीवन का दूसरा मौका देते हैं। डॉ. गुप्ता ने बताया कि 3 साल पहले 16 वर्ष की एक लड़की को एक्यूट मायलॉयड ल्यूकेमिया यानी ब्लड कैंसर का पता चला था।
केवल कीमोथेरेपी से उसका इलाज संभव नहीं था। उसे खून और इम्यून सिस्टम की ज़रूरत थी। इसके बाद उसके पिता हाफ मैच डोनर के रूप में सामने आए और बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया गया।

ट्रांसप्लांट के बाद उसे लगभग 2 महीने तक आइसोलेशन में रहना पड़ा। इलाज के दौरान तीसरे सप्ताह में संक्रमण की समस्या भी हुई, जिससे स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई थी।
हालांकि लगातार निगरानी और इलाज के ज़रिए स्थिति को संभाला। क़रीब 60 दिन बाद उसकी ब्लड रिपोर्ट स्थिर होने लगी और सेहत में सुधार आया। आज ट्रांसप्लांट के 3 साल बाद वह पूरी तरह स्वस्थ है।
वह दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक की पढ़ाई कर रही है। हाल ही में उसने दिल्ली मैराथन में जीत हासिल की है, जो उसकी अच्छी सेहत और फिटनेस को दर्शाता है।









