अयोध्या : Ayodhya Ram Mandir में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर एक नई जांच रिपोर्ट सामने आई है।
रिपोर्ट में ऑन-कैमरा सामने आए एक व्हिसलब्लोअर ने दावा किया है कि मंदिर में आने वाले कीमती चढ़ावे को सुनियोजित तरीके से ठिकाने लगाने का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था।
व्हिसलब्लोअर खुद को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास के करीबी सहयोगी के रूप में पेश करता है।
रिपोर्ट के अनुसार, सोना और चांदी को स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण कराने के बजाय कथित रूप से बोरों में भरकर ट्रेन के माध्यम से कर्नाटक भेजा जाता था, जहां उसे गलाने की प्रक्रिया अपनाई जाती थी।
इस दौरान अयोध्या, फैजाबाद या लखनऊ के स्थानीय ज्वैलर्स की सेवाएं नहीं ली जाती थीं, जिससे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि परिवहन रिकॉर्ड में जानबूझकर हेरफेर किया जाता था। उदाहरण के तौर पर 26 किलोग्राम सोना भेजे जाने के बावजूद आधिकारिक दस्तावेजों में केवल 25 किलोग्राम का उल्लेख किया जाता था।
यदि जांच होती तो कागजात वैध दिखाई देते, जबकि अतिरिक्त सोना कथित रूप से अलग कर लिया जाता था। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है

कि भारी मात्रा में कीमती धातुएं रेल मार्ग से भेजी जाती थीं, जबकि इस पूरी प्रक्रिया से जुड़े कथित संचालक वाणिज्यिक और चार्टर्ड विमानों से यात्रा करते थे। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।








