लखनऊ : India तेजी से बढ़ती जीवनशैली बीमारियों की चुनौती से जूझ रहा है . देश में बदलती जीवनशैली और बढ़ती गैर-संचारी बीमारियां सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं।
इसी विषय पर आयोजित स्पार्क हेल्थ डायलॉग में वरिष्ठ चिकित्सक एवं रिजेनरेटिव मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. बी.एस. राजपूत ने कहा कि भारत तेजी से एपिडेमियोलॉजिकल ट्रांजिशन के दौर से गुजर रहा है,
जहां संक्रामक रोगों की तुलना में क्रॉनिक और लाइफस्टाइल संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि शहरीकरण, शारीरिक गतिविधियों में कमी, असंतुलित खानपान, बढ़ता मोटापा और औसत आयु में वृद्धि के कारण डायबिटीज, आर्थराइटिस, हृदय रोग और अन्य दीर्घकालिक बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
उन्होंने विशेष रूप से नी ऑस्टियोआर्थराइटिस और मस्कुलोस्केलेटल विकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे बड़ी आबादी प्रभावित हो रही है।

डॉ. राजपूत ने कहा कि स्टेम सेल थेरेपी, सेलुलर थेरेपी और रिजेनरेटिव मेडिसिन भविष्य की महत्वपूर्ण चिकित्सा तकनीकें हैं। हालांकि, इनका उपयोग केवल वैज्ञानिक प्रमाणों, नैतिक मानकों और नियामकीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही किया जाना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ये उपचार पारंपरिक चिकित्सा का विकल्प नहीं, बल्कि चयनित मरीजों के लिए सहायक चिकित्सीय विकल्प हैं। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने प्रिवेंटिव हेल्थकेयर, समय पर जांच, बहु-विषयक उपचार और स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
आयोजकों ने कहा कि चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और समाज के बीच संवाद मजबूत करना ही ऐसे कार्यक्रमों का प्रमुख उद्देश्य है।









