लखनऊ : Home Minister Amit Shah ने देश को ड्रग्स और नार्को-टेरर के जाल से मुक्त करने के लिए अगले तीन वर्षों का व्यापक रोडमैप पेश किया है।
इस रणनीति का उद्देश्य केवल नशीले पदार्थों की जब्ती बढ़ाना नहीं, बल्कि उत्पादन, तस्करी, वित्तपोषण और वितरण से जुड़े पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है।
नई दिल्ली में आयोजित नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की 10वीं शीर्ष स्तरीय बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अधिकारियों के साथ देशभर में नशे के कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई की रणनीति साझा की।
बैठक के दौरान वर्ष 2026-2029 के लिए तैयार ‘नशीली दवाओं पर नियंत्रण विजन दस्तावेज’ जारी किया गया। साथ ही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई और लगभग 6,000 करोड़ रुपये मूल्य की 2,09,500 किलोग्राम नशीली दवाओं के निस्तारण के लिए ऑनलाइन ड्रग्स डिस्पोजल अभियान की शुरुआत भी की गई।
गृह मंत्री ने कहा कि आने वाले तीन वर्षों में अभियान का मूल मंत्र **’डिटेक्ट, डिसरप्ट और डिस्ट्रॉय’** रहेगा। इसके तहत पहले ड्रग्स नेटवर्क की पहचान की जाएगी, फिर उसकी सप्लाई चेन, आर्थिक स्रोतों और संचालन तंत्र को पूरी तरह बाधित किया जाएगा तथा अंत में पूरे नेटवर्क को इस तरह समाप्त किया जाएगा कि उसकी दोबारा सक्रिय होने की संभावना न रहे।
सरकार के अनुसार, वर्ष 2014 के बाद ड्रग्स के खिलाफ अभियान में उल्लेखनीय सफलता मिली है। इस दौरान बड़ी मात्रा में मादक पदार्थों की जब्ती, हजारों करोड़ रुपये मूल्य की ड्रग्स का विनाश और अवैध अफीम की खेती पर व्यापक कार्रवाई की गई है। सरकार का दावा है कि जीरो टॉलरेंस की नीति के कारण नार्को नेटवर्क पर लगातार दबाव बढ़ा है।
अमित शाह ने अधिकारियों को राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, आधुनिक तकनीक के अधिक उपयोग, खुफिया तंत्र को मजबूत करने और सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि नशे के कारोबार से जुड़े अपराधियों, तस्करों और नार्को-टेरर के वित्तीय तंत्र के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
सरकार का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में भारत को नशे और उससे जुड़े संगठित अपराध के नेटवर्क से मुक्त करने की दिशा में निर्णायक परिणाम हासिल करना है।









