नई दिल्ली : Supreme Court ने चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को वैध ठहराते हुए कहा है
कि यह प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की संवैधानिक भावना को मजबूत करती है।
बुधवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग ने अपने वैधानिक अधिकारों के दायरे में रहकर यह कदम उठाया है।

अदालत ने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद आवश्यक है और इसे केवल प्रशासनिक सुविधा का मामला नहीं माना जा सकता।
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 326 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के तहत इतने बड़े स्तर पर SIR कराने का अधिकार नहीं है।
बिहार में इस अभियान के पहले चरण के दौरान लाखों नाम प्रारूप मतदाता सूची से हटाए गए थे। याचिकाओं में इस पूरी प्रक्रिया को “NRC जैसी कवायद” बताया गया था।

वहीं चुनाव आयोग ने अदालत में कहा कि आधार कार्ड और वोटर आईडी नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माने जा सकते। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद चुनाव आयोग की कार्रवाई को संवैधानिक और वैध माना।









