BARABANKI : समाज सेवा और शिक्षा पर मौलाना क़ासमी का जोर

BARABANKI । जिले के शहाबपुर स्थित मदरसा शिहाबुल उलूम में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की एक महत्वपूर्ण विचार-विमर्श बैठक आयोजित की गई।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश जमीयत उलेमा के नाज़िम-ए-आला मौलाना अमीनुल हक़ अब्दुल्लाह क़ासमी ने संगठन की भूमिका, सामाजिक जिम्मेदारियों और शिक्षा के महत्व पर विस्तार से अपने विचार रखे।

उन्होंने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद का इतिहास देशहित, समाज सेवा और राष्ट्रीय एकता के लिए समर्पित रहा है। आज भी संगठन का उद्देश्य शिक्षा, सामाजिक सुधार, जनकल्याण और आपसी सद्भाव को मजबूत करना है।

मौलाना क़ासमी ने कहा कि मुसलमानों का मूल संदेश इंसानियत की भलाई और समाज में अमन कायम रखना है। उन्होंने ज़िला, तहसील और स्थानीय इकाइयों को नियमित बैठकें आयोजित कर संगठनात्मक गतिविधियों को और प्रभावी बनाने का आह्वान किया।

बैठक में दर्स-ए-कुरआन, दर्स-ए-हदीस, मकतब स्थापना, समाज सुधार अभियान, जन विकास और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को सक्रिय रूप से संचालित करने पर भी जोर दिया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ कारी मुहम्मद फ़ज़ैल की कुरआन-ए-पाक की तिलावत और मसऊद आलम की नात से हुआ। बैठक की अध्यक्षता कारी मुहम्मद अल्लाह ने की, जबकि संचालन मौलाना मुहम्मद जमाल क़ासमी ने किया।

इस दौरान मौलाना सैयद अज़हर क़ासमी सहित प्रदेश और ज़िला स्तर के अनेक पदाधिकारी, उलेमा, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विभिन्न गांवों से आए बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।

अंत में मौलाना शादाब क़ासमी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया और हाफ़िज़ उबैदुल्लाह बनारसी की दुआ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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